Saturday, July 30, 2011

किसने कहा

किसने कहा, यूँ हुश्न को बेपरदा कर दो |
रहने दो परदा, दीवानों को विदा कर दो |



रफ्त्गुल हुश्न

रफ्त्गुल हुश्न यूँ बेपर्दा नहीं होता |
गर तू आखों से पहचानता होता |

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अब दर्द

अब दर्द ही सही, कुछ तो मिला |
खाली न रहे, निकाला तो सिला |


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आफ़ताब हुश्न

आफ़ताब हुश्न का टपकने लगा है |
दरिया अब नूर का बहने लगा है |


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शहादत में

शहादत में हुश्न की बड़े-बड़ों को पाया है |
बगावत में हुश्न की बड़े-बड़ों को पाया है |


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सरे बाज़ार

सरे बाज़ार हुश्न को बेपर्दा कर चलोगी |
मजमा लग जाएगा, महफ़िल सजेगी |

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दिखाओ हुश्न

ऐसे न दिखाओ हुश्न यूँ बरबाद ये जहाँ होता है |
तेरे चाहने वालों का आखिरी हस्र यहाँ होगा है |


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जुल्फों में

हुश्न की जुल्फों में कोई ऐसा न हो जो उलझा न हो |
प्यार के पलों में कोई ऐसा न हो जो खोया न हो |

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Friday, July 29, 2011

हमारे संग

देखा हुश्न तो, हमको भी सुरूर आ गया |
बीते हुए वक्त का, नगमा याद आ गया |
वक्त पर हम भी फिर, उसी को गा दिए |
उसको सुनकर, वो हमारे संग चल दिए |

( हुश्न वाले तेरा जवाब नहीं )

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अब बेबसी

बस अब बेबसी थी, उसके दिल में न हंसी थी |
रो वो न सकी थी, उसकी आखों में नमीं थी |


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रंगीन गुज़रा

जो वक्त गुज़रा, बेहद रंगीन गुज़रा |
उसका मुखड़ा, बेहद हसीन निखरा |

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जिन्दगी कट

जिन्दगी कट रही थी, किसी तरह |
अब वह न मिल रही थी, उसी तरह |


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घायल हैं

हम तो हुश्न के, तेरी अदा के भी कायल हैं |
तू न देखे, तेरी इस अदा से भी घायल हैं |


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जब सोया

हुश्न जब सोया होता है, कितना हसीन लगता है |
उसे बस एक टक निहारते रहने का जी करता है |


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Thursday, July 28, 2011

इतनी बेदर्दी

इतनी बेदर्दी से, दिल मेरा तोडा |
अवाक रह गया, तुने जो छोड़ा |


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प्यार करने

हुश्न न गरीब था |
आशिक न अमीर था |
दुनिया का यह शगल पुराना था |
हर प्यार करने वाले को बताना था |

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न दीदार

न दीदार कर, न इंतज़ार कर, अब तो हम चले |
न तुम अब आओ, हम तो किसी और के हो चले |


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सताया नहीं

हुश्न को यूँ छुपाया नहीं जाता |
रूह को यूँ जलाया नहीं जाता |
दिल को यूँ रुलाया नहीं जाता |
किसी को यूँ सताया नहीं जाता |


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चन्द रोज़

चन्द रोज़ पहले की तो बात है |
हुई उनसे यूँ मुलाकात है |
आज वो फिर मिल गयीं |
चलते-चलते मेरी बन गयीं |


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मक़सूद हुश्न

मक़सूद हुश्न था,
मक़सूद जवानी थी,
छाई रवानी थी,
एक कहानी थी,


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बहुत हुश्न

बहुत हुश्न को संभाला था, उसमें दिल कितना डाला था |
न मिला चाहने वाला था, सबके दिल पर लगा ताला था |


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मेरे मयखाने

मेरे मयखाने में आकर, इतनी न पिया करो |
ये जुल्म अब बंद करो, अब रहम किया करो |

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यादों के

यादों के उसके सहारे |
बिना किसी को पुकारे |
बीत गयी जिन्दगी यूँ कर गयी |
अब तक याद न उसकी गयी |


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Wednesday, July 27, 2011

ऐसे तो

ऐसे तो रोज़ निकल जाती थी,
यूँ न देर लगाती थी,
पर आज पता नहीं,
अभी तक क्यूँ आयी नहीं,

देखता हूँ, जाता हूँ,
पता लगाता हूँ,
क्या बात है,

पहुंचा वहाँ,
क्या देखता हूँ,
अपनी सहेलियों के साथ,
हो रही उसकी बात है |

चिड़ा रहीं हैं उसे,
चुहुल बाज़ी हो रही है,
शायद किसी दावत की बात हो रही है,
उसकी तरफ से भी हाँ हो रही है,

मुझे जो देखा, आँख फेर ली,
सहेली के काम में कुछ कहा,
सहेली ने इशारा में कहा,
कुछ दूर चलने को कहा,

न आना अब इसके पीछे.
ये जा रही किसी और के पीछे,
खैर अगर चाहो,
दूर अब भागो,

अब क्या बचा था,
मुँह मेरा लटका था,
उन्ही बैठ गया,
न उठा गया,



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फ़ना हुस्न

फ़ना हुस्न को, इश्क पर होना पड़ा |
जब पाला, दीवाने आशिक से पड़ा |






तस्सवुर तेरे

तस्सवुर तेरे चेहरे का, रोज़-रोज़ पीता हूँ |
आज न आ सका, तस्वीर को देख लेता हूँ |

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अभी उसने

अभी उसने देखा, चुहुक-सी गयी |
किया उसने अनदेखा, चमक-सी गयी |

गली के

बहुत देर से उसकी आस में बैठा था |
अपना चेहरा लिए उदास बैठा था |
उसका गली में आना न हो रहा था |
यूँ तो उसकी गली के पास बैठा था |


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जिन्दगी को

जहां में रहकर, जिन्दगी को झुककर, जिसने सलाम किया |
बा खुदा उसने जिन्दगी भर आराम किया |


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आने दो

आने दो, खाने दो, सोने दो, जाने दो |
न रुको, न रोको, न झुको, न झोको |


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इश्क किसे

न हुश्न को पता था, इश्क किसे कहते हैं |
न इश्क को पता था, हुश्न किसे कहते हैं |


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मुस्कान तो

मुस्कान तो बिखेर दी, अब जान भी बिखेर दो |
देर इतनी क्यूँ हो रही, अब कुछ तो बिखेर दो |


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दरबार सज

दरबार सज गया हुश्न का, मल्लिका को आने दो |
बैठे रहने दो दीवानों को, मजनुओं को न जाने दो |

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उसके महक

उसके महक से जिन्दगी महक जाती है |
उसके चहक से जिन्दगी चहक जाती है |
उसके बहक से जिन्दगी बहक जाती है |
उसके लचक से जिन्दगी लचक जाती है |

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बिछड़ा था

काश वो पल न आता, जब मैं उससे बिछड़ा था |
काश वक्त फिर जाता, जब मैं उससे बिछड़ा था |

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तस्वीर उसकी

न भूल सका उसको, जिससे कभी मोहब्बत की |
आखों के सामने रहती, आज भी तस्वीर उसकी |


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गुस्तगुल न

गुस्तगुल न हुआ, मजारे प्यार का |
ऐतबार तो लिख दिया, मेरे यार का |
हूँ फ़ना उसके, जानिबे दीदार का |
न इज़हार कर यूँ, अपने प्यार का |

फासिबे मोहब्बत अब क्यूँ अफसाना हुआ |
नूर-ए-हलक तेरा हुश्न अब क्यूँ दीवाना हुआ |
बेवक्ते तेरे दर पे उसका, यूँ आना क्यूँ हुआ |
हालिबे उसके मजार पे, यूँ जाना क्यूँ हुआ |

इदरिसे हसन्नुम, उसका तरन्नुम, क्या सुना |
वक्त-ए-हाल, मुनासिब ख्याल, उसका क्या सुना |
आदिसे हलक का, उसका हलकान क्या सुना |
सुर-ए-नाज़ुक, गले की सुरमाई, उसका क्या सुना |

दरीबे का आईना, जिन्दगी के तजुर्बे से निखरा |
उसको देखते हुए, जिन्दगी का तजुर्बा तिलखा |
हंसी आती, निगाहें चुराती, जान गयी फलखा |
आबे दयार से निकला, जब उसका यह तलबा |


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पागल न

पागल न समझ, दीवाना कह दे |
किसी का समझ, अपना कह दे |


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खुशबुओं का

बाहर से खुशबुओं का अहसास था |
भीतर से जिन्दगी का अहसास था |

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आज गलियों

न हुश्न था, न हुश्न की नुमाइश थी |
आज गलियों में, बेरुखी सी छाई थी |
उसका दर भी, आज, बन्द लग रहा था |
उसके मिलने को, आज, जी कर रहा था |

बस यूँ गुमसुम-सा, घूम रहा था |
दोस्त न आज कोई, मिल रहा था |
टहलते-टहलते यूँ ही, दूर तक निकल गया |
वही पास एक चाय की दुकान पर बैठ गया |

चुस्कियां चाय की अब चल रही थीं |
आखें अब भी उसके दर पर लगी थीं |
बेसब्री-सी यूँ बढ रही थी |
दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी |

तभी न जाने कोन निकला |
दिल धक् से यूँ बिकला |
ये क्या कातिल बला थी |
अरे ये तो अपनी ही दिला थी |

किसी की कलाकारी ने इसे और हसीन कर दिया था |
सुबह-सुबह इसको किसी ने इतना रंगीन कर दिया था |
बाद में पता चला चाय की दुकान पर |
आज इसको देखने आने वाले हैं, घर पर |

दिल बैठ गया, मैं भी बैठ गया |
मुझको ये क्या सिला दिया |
किसी और की उसे बना दिया |
मैंने ऐसा क्या गुनाह किया |

उठा धीरे-से चल पड़ा घर की ओर |
पड़ा बिस्तर पर, कर पीठ उसके घर की ओर |
तभी घंटी बजी, सामने खड़ी थी सजी |
मुस्करा रही थी, बुलावा आने का भेजी |

साथ में कुछ सामान ले गयी |
आना ज़रूर जाते-जाते कह गयी |
सब घर जाने की तैयारी में लग गया |
मैं भी कोई बहाना ढूढने में लग गया |

अब कैसे जाना होगा |
कैसे मुँह दिखाना होगा |
बस जिन्दगी को भुलाना होगा |
आंसू पीकर शादी में इसकी जाना होगा |


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Tuesday, July 26, 2011

दिलरुबा

किसी का प्यार, किसी का इज़हार |
मेरा ही प्यार, दिलरुबा का इज़हार |
 
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बड़े अच्छे-३


बड़े अच्छे लगते हैं - ३
Bade Achhe Lagte Hain



मिस्टर कपूर ने प्रिया की याद में कुछ यूँ कहा -

कल यूँ बारिश हो रही थी, तेरी याद सता रही थी |
पता नहीं क्यूँ मुझे भी बारिश अच्छी लग रही थी |
शायद इस मौसम में तुम्हारी कमी खल रही थी |
अब ना जाया करो दूर, तुम्हारी याद आ रही थी |

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को भूला

न देखा सुबह का भूला, न देखा शाम का भूला |
जबसे तुझको है देखा, बस देखा अपने को भूला |


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गरीब को

उतर कर हुश्न ने, यूँ जो गरीब को देखा |
नसीब उसका खुल गया, दरीब को देखा |

पागल न

पागल न समझ, दीवाना कह दे |
किसी का समझ, अपना कह दे |


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Monday, July 25, 2011

मेरे दरवाजे

आ कर मेरे दरवाजे पर, यूँ न बैठा करो |
दरीचों से लोग देखते, तुम न देखा करो |
देखकर इस तरह, न मुझे सताया करो |
दूर हटो मेरे दर से, कहीं और बैठा करो |
वक्त बिताने को, कोई और दर ढूंडा करो |


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इनको झगड़ना

राह हुश्न वालों की, यूँ आसान न समझना |
तमाम मजनुओं से, होता इनको झगड़ना |


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पकड़ा ठनके

यूँ तो अब जमीं पर, पैर पड़ते नहीं उनके |
जब उनका-उन्होंने हाथ, जो पकड़ा ठनके |


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शराफत अब

शराफत अब हुश्न की, दिखाई नहीं देती |
सरे आम गलियों में, दिखाई तबसे देती |


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सारा मलाल

हमसे तो उसने नफरत में, बहुत-कुछ कह दिया |
अपने दिल का सारा मलाल, यूँ हम पर बह दिया |


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बेहया की

बेहया की जिन्दगी, कट उसकी बेकार में |
न प्यार मिला, न दुलार मिला, बाज़ार में |

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बेपरदा रहना

अब तो हुश्न को, पर्दा न करना था |
शर्म अब कैसी, बेपरदा रहना था |


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बा-खुदा सारा

बा-खुदा सारा आलम बीत गया, उसे मनाने में |
फिर भी न समझा जालम, लगा उसे पटाने में |


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हाल-बेहाल

हाल-बेहाल जिन्दगी, यूँ ही नहीं कोई सँवार देता |
वफ़ा बिना, कोई किसी को यूँ ही नहीं प्यार देता |


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इशक न

इशक न हुआ किसी से अभी, तलाश में अभी भटकता हूँ |
शायद इसी भटकन में, किसी के दिल से अभी लटकता हूँ |


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एक तोहफा - 7


सुगंधा मिश्रा को एक तोहफा
Sugandha Mishra


खनक सुनी आवाज़ की, दिल को छू गयी |
तेरी खनकती आवाज़, रूह में समाँ गयी || १ ||

मुद्दत से उदास बैठा था, किसी के न पास बैठा था |
कानों में कहीं दूर से, एक सुरीला नगमा गूँजा था |
यूँ ही सुनते-सुनते धीरे-धीरे खुमार चड़ने लगा था |
उठा ढूँढा तो पता चला तेरा नगमा ही बज रहा था || २ ||

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शर्मो-हया

शर्मो-हया का फ़साना, अब न दिखाई देता है |
कहीं-भी कोई दीवाना, अब न दिखाई देता है |
सब तरफ बेहहाई है, बेपरदा हुश्न की रवाई है |
नाज़ न अब हुश्न के पास है, न वो शरमाई है |

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तडफा दिया

जबसे उसने अपने हुश्न को, बेपर्दा किया है |
बाढ़ आगयी है, दीवानों की, तडफा दिया है |

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किनारा कर

किनारा कर लिया, अब मेरी मोहब्बत से |
पहले तो कहते थे, कि न जुदा होंगे तुमसे |

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खोया तुमने

क्यूँ इस तरह, जिन्दगी को, रोया तुमने |
अभी तो बहुत, बाकी है, क्या खोया तुमने |

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नुमाइश तेरी

बेहतर है नुमाइश तेरी, बेहतर है तेरा यूँ कहना |
किसी की मजबूरी को, लफ़्ज़ों में यूँ तेरा पिरोना |

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एक तोहफा - 6



सुगंधा मिश्रा को एक तोहफा
Sugandha Mishra


खता माफ़ करना, यूँ अब रुका जाता नहीं है |
बरबस तेरी तारीफ़ में, शेर निकल आता है || १ ||

क्या करून तू है ऐसी, तेरी खूबसूरती तेरी शोखी |
तारीफ़ तेरी करून, ऐसा एक जोश-सा देती तोखी || २ ||

तारीफ़ करता हूँ, तू वफादार है अपने हुनर से |
रोज़ करती है रियाज़, बिना किसी न नुकर से || ३ ||
खुसबू बिखेरती हो, सभी के आँगन में, सुगंधा नाम है, तुम्हारा |
आवाज़-ए-सुगन्ध और फुहार-ए-हंसी पर इख्तियार है, तुम्हारा || ४ ||
 

हम तरसे

हम तरसे थे, मोहब्बत में तेरे लिए |
बादल जैसे बरसे थे, जमीं के लिए |


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करोगे जिनसे

करोगे जिनसे दोस्ती, दुश्मनी भी उनसे निभानी पड़ेगी |
बात आयेगी मोहब्बत की, कीमत उसकी चुकानी पड़ेगी |
दोस्त को यूँ ही, कुर्बानी अपनी मोहब्बत की देनी पड़ेगी |
हसीना के लिए, जंग फिर अपने दोस्त से लडनी पड़ेगी |


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चन्द लम्हों

चन्द लम्हों का अफसाना था, बीत गयी रात, बताने में |
यूँ जिन्दगी कुछ कम न थी, बीत गयी समझाने में |

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बड़ी बेरुखी

बड़ी बेरुखी से मुंह मोड़ा, बड़ी बेदर्दी से दिल तोडा |
टुकड़े न बीन पाए, मुड़कर भी न देख पाए |

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बड़ी बेवकूफ

बड़ी बेवकूफ थी, तुझसे प्यार कर बैठी,
तेरी बातों में आकर, इज़हार कर बैठी,
न पता था तेरा यूँ जाने का,
मुझे छोड़कर किसी और को अपनाने का,

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तो मजमा

यूँ तो मजमा अब हुश्न का, लगता सरे बाज़ार नहीं |
देखना हो हसीनाओं को तो, आसमान की सैर सही |


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अब पूछते

अब पूछते हो, कितना दुःख तुने सह लिया |
तब न प्यार का, कुछ इस तरह सिला दिया |

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खोलो अंजुमन

यूँ न खोलो अंजुमन को, बंद रहने दो इसे |
आखें अभी खुली नहीं हैं, देख न सकेंगी इसे |

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नफरत न

यूँ तो नफरत न थी बस प्यार था |
उसका इज़हार था, इनकार न था |

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मेरी मजार

कुछ तो मेरी मजार पे फूल चड़ा दो |
अब आये हो तो कुछ आंसू बहा दो |

ऐसी बेरुखी

ऐसी बेरुखी न दिखाओ, चेहरे से नूर टपकने दो |
क्यूँ मोहब्बत को दबा रही हो, यूँ ही महकने दो |


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Sunday, July 24, 2011

एक तोहफा - 5

सुगंधा मिश्रा को एक तोहफा
Sugandha Mishra 



नाभि से सुर उठा, नाद होकर |
छुआ दिल को, अहसास होकर |
कंठ से निकला, सुरीला होकर |
सुगंधा ने गाया,  सुगन्धित होकर |
सबने ने सुना, आनंदित होकर |

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मोहब्बत जता

मिला है प्यार यूँ मोहब्बत जता दी मैंने |
दूरियाँ मिटा दी, फासले मिटा दिए मैंने |


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तय शुदा

तय शुदा जिन्दगी, गुज़र गयी वक्त से पहले |
हर साँस यूँ निकल गयी, हर साँस से पहले |


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साँझ तो

साँझ तो ढल गयी थी, रात तो निकल गयी थी |
आये हुजुर न अब तक, याद तो मचल गयी थी |


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प्यार तो

प्यार तो किया था तुने, पर इज़हार बड़ी बेदर्दी से किया |
जज्बा था पर जोश न था, समझा यह तूने हया से किया |


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तेरे आहाते

कुछ तो वक्त गुज़र लूं, तेरे आहाते में |
फिर कहाँ से आऊंगा, तेरे दरवाजे में |


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बात बन

बात बन गयी यूँ, थोड़े से मनाने से |
रूठ गयी थी वो थोड़े से अन्मनाने से |


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रोक लिया

रोक लिया हुस्न ने की जाओ न अभी |
कुछ देर और बैठो पहलु में मेरे अभी |


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हुश्न बेदार

हुश्न बेदार था, इन्तहा हमसे प्यार था |
रूक सी गयी थी जिन्दगी, बस उसकी हाँ का इंतज़ार था |


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यूँ नजदीक

यूँ नजदीक तेरे हम पहुँच तो गए हैं |
दरवाज़ा खोल दे दिल का, कब से खड़े हैं |


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हमसे नफरत

हमसे नफरत करोगे, मोहब्बत में पछताना होगा |
प्यार के बदले प्यार जब जताना होगा |


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बाकायदा जिन्दगी

बाकायदा जिन्दगी कट गयी तेरी बाँहों में |
किसी की याद न आयी जिन्दगी की राहों में |


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तुम नाराज़

तुम नाराज़ थे जिन्दगी की राहों से |
क्या प्यार न जताया उसने आहों से |


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हमनवा से

हमनवा से दोस्ती दुश्मनी में बदल गयी |
तेरी मोहब्बत प्यार से बेवफाई में बदल गयी |

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है मोहब्बत

है मोहब्बत तो जता दे मेरे पैमाने से |
दूर क्यूँ है यूँ मेरे मयखाने से |
नफरत तो है मोहब्बत का आगाज़ यूँ समझ ले |
तुझे ले जाऊँगा मैं, प्यार तू ये मेरा समझ ले |


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कुछ जिन्दगी

कुछ जिन्दगी को, दूर से देखा न किसी ने |
पास आया नफरत का जूनून देखा न किसी ने |

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Saturday, July 23, 2011

एक तोहफा - 4

सुगंधा मिश्रा को एक तोहफा
Sugandha Mishra




हुश्न भी पाया है, आवाज़ भी पायी है |
अदा भी पायी है, अदाकारी भी पायी हैं |

सबसे बड़ी बात है की, जज्बातों की कदर करती हो |
दूसरों के दिल की बात को, अपने दिल से सुनती हो |

ये नवाजिस खुदा सबको नहीं देता है |
किसी खास को ही यह तोहफा देता है |

तुम पर खुदा की मेहर बनी रहे |
हम पर तुम्हारी नज़र बनी रहे |

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चन्द लम्हों

चन्द लम्हों को, चन्द लफ़्ज़ों में पिरो लेता हूँ |
जिन्दगी के चन्द पलों को, सभी से कह लेता हूँ |

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कोन वो

कोन वो खुशनसीब होगा, जिसका तू हमसफ़र होगा |
जिन्दगी सँवर जायेगी उसकी, हसीं उसका सफ़र होगा |

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समझ अपने

यूँ न समझ अपने हुश्न को, जंग-पे-जंग लडवा सकता है |
निकल तो मैदान में, दोस्त से दोस्त को मरवा सकता है |

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शुक्रिया आपका

शुक्रिया आपका, मेहरबानी आपकी |
इस काबिल समझा कदरदानी आपकी |


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लगाने को

लगाने को तो दिल लगाना, बस चन्द घड़ियों की बात है |
पर लगाकर फिर संभालना, ये जन्मों-जन्मो की बात है |
कारीगरी इसमें मिट-मिट कर आती है |
किसी को भाति, किसी को न सुहाती है |
बस इसका इतना तो, असर पड़ता है |
जिन्दगी को दाव पर लगाना पड़ता है |
लगाते-लगाते फिर ये लग जाता है |
संभलते-संभलते ये संभल जाता है |
लो बता दिया दिल का फ़साना, सोच कर न दिल लगाना |
यूँ दिल जब करे इनकार, तो फिर दिल उसी से है लगाना |

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कुछ इस

कुछ इस तरह से, उसकी नज़र, यूँ, गुज़र गयी |
वफ़ा थी वह, पर न जाने क्यूँ बेवफाई कर गयी |


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शायरों की

शायरों की जिन्दगी का आलम, शेर में नज़र आता है |
समझ लेता है, हर कोई, यूँ जिन्दगी से गुज़र जाता है |

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अब अलग

ऐसा भी क्या था, जो छिपा लिया हमसे |
भूल गए क्या, अब अलग नहीं हैं तुमसे |

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रोना-धोना

बस अब बहुत हुआ ये रोना-धोना |
अब चलो मेरे बिना यहाँ न रहना |
अब तो साथ रहेंगे, साथ सहेंगे |
दिन जिन्दगी के, साथ बीतेंगे |

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तेरी-मेरी

कुछ तो हाल दिल का कह दो, यूँ न जाओ |
नज़रें ही मिला लो, यूँ चुराकर तो न जाओ |
पड़ लेंगे हाल पूरी रूह का, नज़रों से तेरी |
न भी मिलीं तो, धड़कन है एक तेरी-मेरी |

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ये क्यूँ

ये क्यूँ भटक रही है, नज़र किसी पर न टिक रही है |
बेचैन क्यूँ दिख रही है, शायद किसी को ढूँढ रही है |


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दिल पर

दिल पर दरवाज़ा न रखा, कि कोई तोड़ न दे |
दिल को खली न रखा, कि कोई मोड़ न दे |


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नज़र टिक

नज़र टिक गयी नज़ारे पर |
आँख लग गयी इशारे पर |
हुश्न को अब क्या करना है |
हमको ही मरना-मिटना है |


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रहने दे

रहने दे बस, सताना छोड़ दे उसको |
वो तेरी नहीं, जताना छोड़ दे उसको |


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दीवानेपन की

दीवानेपन की हद, बेहद होती है |
हदों के खात्मे पर, शुरू होती है |

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खुदा तेरा

खुदा तेरा शुक्रिया, इन हसीनाओं का दीदार करा रहा है |
एक-से-एक हुश्न के नागीनो का, आज दीदार करा रहा है |


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अब अगली

अब अगली मुलाकात के, वक्त का इंतज़ार रहेगा |
तुझे याद करते हुए, अब दिन-रात कटेगा |
ऐसे तो यह वक्त बहुत खुशगवार गुज़रा |
याद रहेगा एक-एक लम्हा, जो तेरे साथ गुज़रा |

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बहुतों ने

बहुतों ने प्यार किया, बहुतों ने इज़हार किया |
हमने जो प्यार किया, हमने जो इज़हार किया |


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कनखियों से

कनखियों से वो देख लेती है, फिर मुँह उस तरफ फेर लेती है |
मची है हलचल उसके दिल में, यूँ ही अपने को समझा लेती है |

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भूलेगी न

भूलेगी न वो अब, उम्र भर मुझे |
भले इज़हार करे प्यार का न मुझे |


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दिल में

दिल में बीज प्यार का, अब उसके जमा दिया |
अब उसे अपने प्यार का, अहसास करा दिया |


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तेरे नैनों

तेरे नैनों में, तेरा दिल उभर आया है |
तू छिपा ले, ज़माने को नज़र आया है |


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बसते हो

बसते हो निगाहों में, तुम्हे अब निस-दिन देख सकूंगी |
आ तो गए हो, तुम्हे देखने के लिए, अब आखें न खोल सकूंगी |


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हवाला दिया

हवाला दिया हुश्न का, यूँ बेपर्दा होकर |
सरे बाज़ार गिर पड़ा मैं, गश खाकर |


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बेफिक्र यूँ

बेफिक्र यूँ जिन्दगी चल रही थी, दुनिया से अन्जान होकर |
आपकी नज़र ने जबसे देखा, अपनी नज़र की जान होकर |

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दिल न













झूठी मुस्कुराहट का भी, अपना असर है |
लगता है हमको, कुछ हमारी भी कदर है || 1 ||

उसकी मुस्कान का, कुछ मतलब न लगा लेना |
वो परी है जहाज़ की, दिल न उससे लगा लेना || 2 ||

सही कहा है, परियाँ जन्नत में होती हैं, जन्नत आसमान में होती है |
तो, आसमान के जहाज़ की ये सुंदरियाँ, क्या परियों से कम होती हैं || 3 ||

चेहरा मुस्कुराता है, दिल न लगाती हैं वो |
बस दूर से ही, इंसान से नज़रें चुराती हैं वो || 4 ||

खुदा ने हुश्न भी तो आसमान में लटका दिया है |
इस गरीब को इस हाल में एक फटका दिया है || 5 ||

इतनी ख़ूबसूरती, जमीं पर पैर न धरती है |
नज़रों से लगता है, किसी और पर मरती है || 6 ||

कितना बेदर्द नज़ारा था, हुश्न होते हुए बेदारा था |
बस एक तकल्लुफ था, हुश्न भी किये किनारा था || 7 ||

कितना सहती हैं रोज़, किनके-किनके आखों कि बेहहाई |
गर पूछ लो इनसे, पता चल जाए सबके नज़र कि सफाई || 8 ||

शायद ही किसी ने, नज़रें न मिलाई हों इनसे |
नजर से दिल मिलाने की आरज़ू की हो इनसे || 9 ||

इन हसीनों को भी काम करना पड़ता है |
दूसरों का कितना ख्याल रखना पड़ता है || 10 ||

गर वक्त होता, थोडा अभी पीछे |
दीदार न होता, इनका यूँ दरीचे |
होती ये किसी, सूबे की मल्लिका |
न देख पाते यूँ, इनका ये सलीका || 11 ||

पहरे में रहतीं, हर वक्त किसी के |
न गौर से देख पाते, यूँ जी भर के |
खुदा ने हम पर, मेहरबानी की है |
इनको न यूँ, किसी की रानी की है || 12 ||

सहमी सी जिन्दगी का, चेहरे से झलक आता है |
किसी और के सामने, चेहरा यूँ जो मुस्कुराता है || 13 ||

दिल में यूँ कितनी कसमसाहट होती है तब |
कोई अनजान हसीना, मुस्कुरा देती है जब |
कई तो आदि हैं इसके, न देखते हैं उनकी तरफ |
कैसे छिपाए, दिल का अरमाँ देखें उनकी तरफ || 14 ||

बड़ा अजीब लगता है, हलचल सी मच जाती है |
समझ न पड़ता, दिल में झंकार से बज जाती है || 15 ||

इस तरह शायद बहुत किस्से बने होंगे |
इन हसीनाओं के बहुत दीवाने बने होंगे || 16 ||
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यूँ न

यूँ न दिखाओ मंज़र, अब जुल्म सह नहीं सकती |
पड़ा रहने दो बेखबर, तन्हाई अब जा नहीं सकती |


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हमसे वक्त

हमसे वक्त ने कुछ यूँ कहा |
अब तो मैं बस बीत चला |
बापिस फिर न आऊंगा |
जिन्दगी फिर न बसाऊंगा |

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तेरी बेवफाई

मेरे तो दिल में अब मकाँ किसी और ने बना लिया |
तू बेवफा निकल गयी, तेरी बेवफाई को बसा लिया |

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यूँ जिन्दगी

यूँ जिन्दगी के हवाले से, तुमने ये क्या कह दिया |
दिल चीर कर निकल गया, खून भी न बहने दिया |


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दिल के

दिल के दरवाजे पर नाम उसका रहने दो |
काम तुम करो, बस नाम उसका रहने दो |


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पर्दा अब

न हुश्न को छिपा, दीदार अब करने दे |
बेपर्दा जब हो गयी, पर्दा अब रहने दे |


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महफ़िलें न

महफ़िलें न सुहाती हैं, मौसिकी न भाती है |
तनहा-सी जिन्दगी है, आग सुलग-सी जाती है |

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Wednesday, July 20, 2011

तनहा-सा

तनहा-सा हो गया उसके जाने के बाद |
गुमसुम-सा हो गया उसके जाने के बाद |


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किस्सा किसे

किस्सा किसे सुनाये तेरी बेदर्दी का, यहाँ सब बेदर्द हैं |
सबके अपने-अपने किस्से हैं, यहाँ सब मेरे हमदर्द हैं |

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दिल ही

दिल ही दिल में प्यार किया, उसने कब इनकार किया |
बात जब इज़हार की आयी, झट उसने इनकार किया |

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न जताना

न जताना चाहती थी, ज़माने के सामने |
हया उसकी आ गयी थी, उसके सामने |


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चाहती थी

चाहती थी मन में, कह न सकी कभी |
किसी दुसरे के साथ, चली गयी अभी |


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हर नज़र

हर नज़र का, असर था, तेरी नज़र पर |
हया की शोखी थी, तेरे नूर-ए-नज़र पर |

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नज़रें यूँ

नज़रें यूँ घूर रही थी, सांसें यूँ थाम रही थी |
बचकर ज़माने की नज़रों, भाग मैं रही थी |

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आशिकों के

आशिकों के किस्से, बड़े निराले होते हैं |
आशिक ही, इसे समझने वाले होते हैं |

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थे मोहब्बत

न जानते थे मोहब्बत, तब किया प्यार उसने |
न समझ सके उसे, जब इनकार किया उसने |
बात समझ, देर से आयी |
जब हमसे दूर होने आयी |

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हर हुश्न

बेपर्दा, हर हुश्न हो जाए, तो क़यामत आ जायेगी |
दीवानों की बस्ती जहाँ में, जहाँ-तहाँ बस जायेगी |


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चन्द पलों

चन्द पलों की तो बात है, देख लेने दो |
गुज़र जाने दो रास्तों से, दम लेने दो |
ओझल हुआ जो नज़ारा, बस लेने दो |
न भागो इस तरह, कुछ चैन लेने दो |

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बड़ी हसरतें

बड़ी हसरतें थीं तुझे देखने की, पर बस अब तो जा रहा हूँ |
शायद कभी नसीब से मिल पाया, ऐसी आस लगा रहा हूँ |

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मुद्दतों से

मुद्दतों से वक्त, यूँ बस गुजार रहा था |
किसी का इंजतार, बस कर रहा था |
आ गया अचानक, आखों के सामने |
भर लिया बाँहों में उसे, लगा समाने |
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मरहम लगा

मरहम लगा दिया किसी के प्यार पर, फिर न उघाड़ना उसका सुखा हुआ जख्म |
वो मारे दर्द के मर जाएगा, याद में किसी की, दे जाएगा तुम्हे भी एक ताज़ा जख्म |

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बस यूँ

बस यूँ बसा लिया था, दिल में मकाँ तेरा |
बैठकर वहीँ, लग जाता था, दिल ये मेरा |.

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हुश्न दिया

हुश्न दिया है, तो गुरुर कर सकते हो |
दिल दिया है, तो प्यार कर सकते हो |


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हमसे यूँ

हमसे यूँ बेगानों की तरह बात न करो |
हमको यूँ अनजानों की तरह न देखो |

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Tuesday, July 19, 2011

एक तोहफा - 3



सुगंधा मिश्रा को एक तोहफा
Sugandha Mishra


बात जज्बातों की सुरों में पिरोना |
आवाज़ से सजाना, उसको गाना |
अंदाज़ ये तुम्हारा, दिल पे छाना |
सबको है भाता तुम्हारा यूँ  गाना |

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मुझे न

मुझे न पता था, इश्क में बात, इशारों में होती है |
अब पता चला, इशारों की बोली, इश्क में इजाद होती है |


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ऐसी किसी



ऐसी किसी राहों पर, होंगी अपनी मुलाकातें |
कोई तो अपनी होगी, जो पकड़ेगी मेरी बाहें |
गुमसुम रहेंगे दोनों, बातें तब न होंगी |
रास्ते पर कदम होंगे, बाँहों में बाहें होंगी |

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ऐसी क्या

ऐसी क्या बेदर्दी थी कि, दिल हमारा तोड़ दिया |
ऐसी क्या हमदर्दी थी कि, गम के सहारे छोड़ दिया |

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सवाल जिन्दगी

सवाल जिन्दगी का न होता तो मौत भी कबूल थी |
मलाल दिल का न होता तो मोहब्बत भी कबूल थी |


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ये गाफिल

है हुश्न तेरा सिर्फ मेरी नज़र के काबिल |
किसी और को न दिखा इसे ये गाफिल |

ہے حشن تیرا صرف میری نظر کے کبل
کسی اور کو ن دکھا اسے یہ گافل

Hai Hushn Tera Sirf Meri Nazar Ke Kabil
Kisi Aur Ko Na Dikha Ise Ye Gafil

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काबलियत मिली

आपसे जिन्दगी बनी, आपसे बन्दगी मिली |
मैं बे काबिल था, आपसे काबलियत मिली |

آپسے جندگی بنی، آپسے بندگی ملی
میں بے کبل تھا ، آپسے کابلیت ملی

Aapse Jindgi Bani, Aapse Bandgi Mili
Main Be Kabil Tha, Aapse Kaabliyat Mili
 
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तेरी बदौलत

तुझे क्या कहूं,
तुझे कैसे कहूं,
न लफ्ज़ हैं,
न जुबान है |
न हौसला है,
न हिमाकत है,
बस कुछ भी है,
तेरी बदौलत है |

تجھے کیا کہوں،
تجھے کیسے کہوں،
نہ لفظ ہیں،
نہ جبان ہے،
نہ حوصلہ ہے،
نہ حمکت ہے،
بس کچھ بھی ہے
تیری بدولت ہے

Tujhe Kya Kahoon,
Tujhe Kaise Kahoon,
Na Lafz Hai,
Na Jubaan Hai.
Na Hausla Hai,
Na Himakat Hai,
Bas Kuch Bhi Hai,
Teri Badaulat Hai.


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नगमा आप

रूहानियत की ग़ज़ल आपसे बहती है |

रूहानियत की नज्म आपसे बहती है |
रूहानियत का नगमा आप गाती हैं |
रूहानियत का मंज़र आप दिखाती हैं |

روحانیت کی گزل آپسے بہتے ہے
روحانیت کی نظم آپسے بہتے ہے
روحانیت کا ناگما آپ گاتے ہیں
روحانیت کا منظر آپ دکھاتی ہیں

Ruhaniyat Ki Gazal Aapse Bahtee Hai
Ruhaniyat Ki Nazm Aapse Bahtee Hai
Ruhaniyat Ka Nagma Aap Gaati Hain
Ruhaniyat Ka Manzar Aap Dikhati Hain

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रूहानियत की

रूहानियत की लहरों में बहना आपने सिखाया |
रूहानियत की जिन्दगी से रूबरू आपने कराया |

روحانیت کی لہروں میں بہنا اپنے سکھایا
روحانیت کی جندگی سے روبرو اپنے کرایا

Ruhaniyat Ki Lahron Mein Bahna Aapne Sikhaya
Ruhaniyat Ki Jindgi Se Rubru Aapne Karaya

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Monday, July 18, 2011

दिल का

दिल का जख्म, तो, यूँ सीने से उभर आया है |
किसी ने दिल थोडा, दिल से लहू बह आया है |
दिखा न रहे थे, जमाने को, पर अब तो सब ने देखा है |
तेरी बेवफाई का, खौफनाक नतीजा ज़माने ने देखा है |

دل کا جخم، تو، یوں سینے سے ابھر آیا ہے
کسی نے دل تودہ، دل سے لہو بہ آیا ہے
دکھا ن رہے تھے، جمانے کو، پر اب تو سب نے دیکھا ہے
تیری بیوافی کا، کوفناک نتیجہ نمانے نے دیکھا ہے

Dil Ka Jakhm, To, Yun Seene Se Ubhar Aaya hai
Kisi Ne Dil Toda, Dil Se Lahoo Bah Aaya Hai
Dikha Na Rahe The, Jamane Ko, Par Ab To Sab Ne Dekha Hai
Teri Bewafai Ka, Kaufnaak Nateeja Jamane Ne Dekha Hai

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आंसू यूँ

आंसू यूँ बह गए किसी कि बेवफाई से |
दरिया जैसे बह गया हो बड़ी रुखाई से |

آنسو یوں بہ گئے کسی کی بیوافی سے
دریا جیسے بہ گیا ہو بدی رکھی سے

Aansu Yun Bah Gaye Kisi Ki Bewafai Se
Dariya Jaise Bah Gaya Ho Badi Rukhai Se


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तोहफा हसीन

तोहफा हसीन था, तेरी नज़र कर दिया |
तू हसीन है, कुछ तेरी नज़र कर दिया |

تحفہ حسین تھا، تیری نظر کر دیا
تو حسین ہے، کچھ تیری نظر کر دیا

Tohfa Haseen Tha, Teri Nazar Kar Diya.
Tu Haseen Hai, Kuch Teri Nazar Kar Diya.


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छुपाओ हांथों

आखें न छुपाओ हांथों से, कुछ तो देख लेने दो |
रो रही हैं, कि खो रही हैं, इतना तो देख लेने दो |

اکھیں نہ چھپاؤ ہانتھوں سے، کچھ تو دیکھ لینے دو
رو رہی ہیں، کی کھو رہی ہیں، اتنا تو دیکھ لینے دو

Akhen Na Chhupao Hanthon Se, Kuch To Dekh Lene Do.
Ro Rahi Hain, Ki Kho Rahi Hain, Itna To Dekh Lene Do.



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रुहानियत की

रुहानियत की ग़ज़ल आपसे बहती है |
रुहानियत की नज़्म आपसे बहती है |
रुहानियत का नगमा आप गाती हैं |
रुहानियत का मंज़र आप दिखाती हैं |

روحانیت کی گزل آپسے بہتے ہے
روحانیت کی نظم آپسے بہتی ہے
روحانیت کا ناگما آپ گاتی ہیں
روحانیت کا منظر آپ دکھاتی ہیں

Ruhaniyat Ki Gazal Aapse Bahtee Hai
Ruhaniyat Ki Nazm Aapse Bahtee Hai
Ruhaniyat Ka Nagma Aap Gaati Hain
Ruhaniyat Ka Manzar Aap Dikhati Hain

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हया नज़रों

हया नज़रों में होती है, ये आज मैंने देखा है |
झुकी जब नज़रें उसकी, हया को मैंने देखा है |

ہی نظروں میں ہوتی ہے، یہ از مہینے دیکھا ہے
جھکی جب نظریں اسکی، ہی کو مہینے دیکھا ہے

Haya Nazron Mein Hoti Hai, Ye Aaz Maine Dekha Hai
Jhuki Jab Nazren Uski, Haya Ko Maine Dekha Hai


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बेज़ार दुनिया

बेज़ार दुनिया का फ़साना क्या सुना दिया, तुम तो यूँ ही नाराज़ हो गए |
चलो अब थोडा हंस भी दो, दुनिया को दिखा दो, यूँ न हम बरबाद हो गए |

بیزار دنیا کا فسانہ کیا سنا دیا، تم تو یوں ہی ناراض ہو گئے
چلو اب تھودا ہنس بھی دو، دنیا کو دکھا دو، یوں ن ہم برباد ہو گئے

Bezaar Duniya Ka Fasaana Kya Suna Diya, Tum To Yun Hi Naraaz Ho Gaye.
Chalo Ab Thoda Hans Bhi Do, Duniya Ko Dikha Do, Yun Na Ham Barbaad Ho Gaye.


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हुश्न के

हुश्न के बाज़ार में, दीवानों का नाम होता है |
क्यूँ आये, यहाँ बस इश्क बदनाम होता है |

حشن کے بازار میں دیوانوں کا نام ہوتا ہے
کیوں اے، یہاں بس اشک بدنام ہوتا ہے

Hushn Ke Bazaar Mein, Deewanon Ka Naam Hota Hai
Kyun Aaye, Yahaan Bas Ishk Badnaam Hota Hai.

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वफ़ा का

वफ़ा का जोर था, बेवफा निकल गया |
प्यार किसी का था, किसी को मिल गया |

وفا کا جوڑ تھا، بیوفا نکل گیا
پیار کسی کا تھا ، کسی کو مل گیا

Wafa Ka Jor Tha, Bewafa Nikal Gaya.
Pyar Kisi Ka Tha, Kisi Ko Mil Gaya.

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Sunday, July 17, 2011

हमसे यूँ

हमसे यूँ हुश्न का दीदार नहीं होता |
खड़ी हो चुपचाप यूँ प्यार नहीं होता |

ہمسے یوں حشن کا دیدار نہیں ہوتا
کھدی ہو چپچھاپ یوں پیار نہیں ہوتا

Hamse Yun Hushn Ka Deedar Naheen Hota
Khadi Ho Chupchaap Yun Pyar Naheen Hota

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नज़र मिला

नज़र मिला लो अब तो, ऊपर तो देखो ज़रा |
कब तब यूँ खड़ी रहोगी, कुछ तो कहो ज़रा |

نظر ملا لو اب تو، اپر تو دیکھو ذرا
کب تک یوں کھدی رہوگے، کچھ تو کہو ذرا

Nazar Mila Lo Ab To, Upar To Dekho Jara.
Kab Tak Yun Khadi Rahogi, Kuch To Kaho Zara.

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हया से

हया से नज़र झुक गयी, ओंठों पर मुस्कान बिखर गयी |
सुर्ख गालों की ये शोखियाँ, दिल में कुछ यूँ उतर गयी |

ہی سے نظر جھک گیے، انتھون پر مسکان بکھر گیے
سرخ گالوں کی یہ شوخیاں، دل میں کچھ یوں اتر گیئں

Haya Se Nazar Jhuk Gayee, Onthon Par Muskaan Bikhar Gayee.
Surkh Gaalon Ki Ye Shokhiyaan, Dil Mein Kuch Yun Utar Gayee.

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ढांक कर

कुछ तो करो, हुश्न को जो संभाल के रखा है |
न आने दो इसे नज़रों में, ढांक कर रखा है |

کچھ تو کرو، حشن کو جو سمبھال کے رکھا ہے
ن آنے دو اسے نظروں میں ، دھنک کر رکھا ہے

Kuch To Karo, Hushn Ko Jo Sambhal Ke Rakha Hai
Na Aane Do Ise Nazron Mein, Dhank Kar Rakha hai.

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सफाक हुश्न

सफाक हुश्न ये बेहन्तेहा झुकी नज़रें, जीने न देंगी |
ये मासूम अदा दिल में, उतर गयी तो मरने न देंगी |

صفاق حشن یہ بحنتہا جھکی نظریں، جینے ن ڈینگی
یہ معصوم ادا دل میں اتر گیے تو مرنے ن ڈینگی

Safaaq Hushn Ye Behantaha Jhuki Nazren, Jeene Na Dengi
Ye Maasoom Ada Dil Mein, Utar Gayee To Marne Na Dengi.

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खुसबू बिखेरती

खुसबू बिखेरती हो, सभी के आँगन में, सुगंधा नाम है, तुम्हारा |
आवाज़-ए-सुगन्ध और फुहार-ए-हंसी पर इख्तयार है, तुम्हारा |

خشو بکھیرتی ہو، سبھی کے آنگن میں، سگندھا نام ہے، تمہارا.
آواز-ا-سگندہ اور فہر--ا-ہنسی پر اختیار ہے، تمہارا.

Khushoo Bikherti Ho, Sabhi Ke Aangan Mein, Sugandha Naam Hai Tumhara.
Aawaz-e-Sugnadh Aur Fuhar-e-Hansi Par Ikhtyaar hai, Tumhara.
 
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वक्त का

वक्त का इंतज़ार किया, तुझसे जो प्यार किया |
तुने क्या सिला दिया, किसी और से मिला दिया |

وکٹ کا انتظار کیا، تجھسے جو پیار کیا
تونے کیا سلا دیا، کسی اور سے ملا دیا

Vakt Ka Intzaar Kiya, Tujhse Jo Pyar Kiya.
Tune Kya Sila Diya, Kisi Aur Se Mila Diya.

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महरूम रहा

महरूम रहा तेरे इन्तखाब का |
यह सिला मिला मेरे प्यार का |
यूँ तो बेदर्दी न दिखानी थी |
कुछ तो हमदर्दी जतानी थी |

محروم رہا تیرے انتخاب کا
یہ سلا ملا میرے پیار کا
یوں تو بیدردی ن دکھانی تھی
کچھ تو ہمدردی جتانی تھی

Mehroom Raha Tere Intkhab Ka.
Yah Sila Mila Mere Pyar Ka
Yun To Bedardi N Dikhani Thi
Kuch to Hamdardi Jataani Thi

चन्द गलियों

चन्द गलियों से न गुज़रना होता यूँ रोज़ |
शायद मिल जाओ किसी मोड़ पे यूँ हर रोज़ |

چند گلیوں سے ن گزرنا ہوتا یوں روز
شاید مل جاؤ کسی موڈ پی یوں ہر روز

Chand Galiyon Se Na Guzarna Hota Yun Roz
Shayad Mil Jaao Kisi Mod Pe Yun Har Roz.

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किसी के

किसी के दीवाने से, ये मत पूंछो, मोहब्बत तुने कैसे सीखी |
दीदार तेरा जब से हो गया,  मोहब्बत जहन में उतर नीखी |

کسی کے دیوانے سے، یہ مت پوچھو، موحبّت تونے کیسے سیکھی
دیدار تیرا جب سے ہو گیا، موحبّت جہاں میں اتر نیکھی

Kisi Ke Deewane se, Ye Mat Poocho, Mohabbat Tune Kaise Seekhi.
Deedar Tera Jab Se Ho Gaya, Mohabbat Jahan Mein Utar Neekhi.
 
 
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चौखट पर

चौखट पर तेरी अब, मैं दम न तोडूंगा |
उठा ले जाऊँगा, तेरे दर को न छोडूंगा |

چوکھٹ پر تیری اب میں دم ن تودونگا
اٹھا کر لے جاونگا تیرے دار کو ن چودونگا

Chaukhat Par Teri Ab Main Dam Na Todoonga.
Utha Le Jaaunga, Tere Dar Ko Na Chodunga.

शमशीरों के

शमशीरों के साए में, जो रहना सीख गया |
खौफ कैसा, मैदानें जंग में जीना सीख गया |

شمشیروں کے سے میں جو رہنا سیکھ گیا
خوف کیسا میدانے جنگ میں جینا سیکھ گیا

Shamsheeron Ke Saaye Mein Jo Rahna Seekh Gaya.
Kauf Kaisa, Maidane Jang Mein Jeena Seekh Gaya .

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आँचल जो

मासूम निगाहों का आँचल जो उठा है |
निगेहबान हुई निगाहें, दिल मचला है |

معصوم نگاہوں کا آنچل جو اٹھا ہے
نگہبان ہے نگاہیں دل مچلا ہے

Masoom Nigahon ka Aanchal Jo Utha Hai
Nigehbaan Huee Nigahen Dil Machala Hai .

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Saturday, July 16, 2011

ज़माने से

ज़माने से नफरत करो, हमसे क्यूँ करते हो |
हमसे मोहब्बत करो, ज़माने से क्यूँ डरते हो |

جمانے سے نفرت کرو، ہمسے کیوں کرتے ہو،
ہمسے موحبّت کرو، جمانے سے کیوں ڈرتے ہو،

Jamane Se Nafart Karo, Hamse Kyun Karte Ho.
Hamse Mohabbat karo, Jamane Se Kyun Darte Ho.

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न कुछ

न कुछ कहो, नैनों को कहने दो |
न कुछ सुनो, सांसों को बहने दो |

نہ کچھ کہو، نینو کو کہنے دو.
نہ کچھ سنو، سانسوں کو بہنے دو.

Na Kuch Kaho, Naino Ko Kahne Do.
Na Kuch Suno, Sanson Ko Bahne Do.




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ऐसे तो

ऐसे तो उदास न बनो, दिल के तलबगार न बनो |
गर हो गयी खता हमसे, उसे अब माफ़ करो |

ایسے تو اداس ن بنو، دل کے طلبگار ن بنو
گر ہو گیے کھاتا ہمسے، اسے اب معاف کرو

Aise To Udaas Na Bano, Dil Ke Talabgaar Na Bano.
Gar Ho Gayee Khata Hamse, Use Ab Maaf Karo.

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ये परवाना

क्यूँ ये परवाना इस तरह जान देता है,
जलती शमाँ में अपने को डुबो देता ये |
गर इश्क में इसका भी बस चलता तो,
जान देने पर शमाँ को मजबूर करता ये |

کیوں یہ پروانہ اس طرح جان دیتا ہے،
جلتی سما میں اپنے کو دبا دیتا یہ،
گر اشک میں اسکا بھی بس چلتا تو،
جان دینے پر شمع کو مزبور کرتا یہ.

Kyun Ye Parwana Is Tarah Jaan Deta Hai,
Jalti Shama Mein Apne Ko Dubo Deta Ye.
Gar Ishk Mein Iska Bhi Bas Chalta To,
Jaan Dene Par Shama Ko Mazboor Karta Ye.


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मुबारक हुश्न

मुबारक हुश्न जो तुने पाया है, उसका दीदार तो करा दे |
यूँ न जाया कर पर्दा करके, थोडा मुखड़ा तो दिखा दे |

हमारे परवाने

हमारे परवाने को, वो बेदार कर गयी |
हमने कुछ कहा, वो इनकार कर गयी |
हम अब ताला लगा लेते हैं, जुबान पर |
और बैठ जाते हैं, उसके मकान पर |

हर लम्बा

हर लम्बा मोहब्बत का कम नहीं होता |
छूट जाती है मोहब्बत गम सभी को होता |

आँख यूँ

आँख यूँ नम हुई, दिल यूँ खोने लगा |
तुम जो छोड़कर गई, दिल यूँ रोने लगा |

जज्बा-ए-हुश्न

जज्बा-ए-हुश्न मैं क्या कहूँ, तेरे हुश्न ने मुझे मारा है |
तू यूँ क्यूँ न समझ रही, तेरे नैनो ने मुझे तारा है |

ऐसे तो

ऐसे तो बहुत वक्त हुआ, उसका दीदार हुए |
आज फिर बैठें हैं, दिल में एक आस लिए |

वो खड़ी है

वो खड़ी है,
किसी के इंतज़ार में,
कोई तो आने वाला है,
आखें गडी हैं, राह पर,
तक रही हैं, हर राही को,
दिल बेचैन हो रहा है,
अमन चैन खो रहा है,
बार-बार घडी वो देख रही है,
पर वो खड़ी है,
किसी के इंतज़ार में,

वक्त कुछ गुज़र रहा है,
दिल उसका बैठ रहा है,
सोच कुछ न रही है,
मन अटकलों में जा रहा है,
वो होश खो रही है,
जोश वो खो रही है,
पर जज्बा न खो रही है,
वो अभी न रो रही है,
वो अभी तक खड़ी है,
किसी के इंतज़ार में,

दरवाज़े पर

दरवाज़े पर वो आये हैं, उन्हें भीतर तो ले आओ |
बड़ी आस लेकर आये हैं, उन्हें खिलाओ तो पिलाओ |

नुख्ता-ए-नूर

नुख्ता-ए-नूर को दिल में बिठा लिया |
उसको जगा दिया, उसको जगा दिया |
जानिब काबिल था, तेरी दोस्ती का, कातिल नहीं था |
खादिम खुदा का बन्दा था, फातिल नहीं था |

हमसे नज़र

हमसे नज़र उठाओ तो, ज़माने को देख लो |
अपनी नज़र से न देख सको तो, हमारी नज़र से देख लो |

साफे गम

साफे गम में दुनिया है |
गम की महफिल में मुनिया है |
गर करो राजदार तो |
हर दिल में एक दुनिया है |

गुनाहों पर

गुनाहों पर पर्दा पड़ा रहने दो |
राजदारों को राजदार रहने दो |
वक्त खोल देगा सब राज़ |
खुदा कर देगा सब गुनाह माफ़ |

दिल में

वक्त का वो मंज़र था |
दिल में गडा खंज़र था |
मौत भी न आ रही थी |
दिल को यूँ सता रही थी |

Wednesday, July 13, 2011

वजह: फरमाया

वजह: फरमाया आपने, ये तो न सोचा था ख्वाब में |
गर यूँ ही सेहरे सजते रहे, बकरे यूँ ही कटते रहे |
कोई न फिर साजदार होगा, उसका न कोई राजदार होगा |
पर जिन्दगी का एक उसूल है, करो तो कुबूल है |

सेहरा ही जिन्दगी को सवाँर देता है |
गवाँर को एक प्यार देता है |
किसी को एक दुलार देता है |
उनको एक मुनार देता है |

अभी तो लग रहा है की, जिन्दगी छूट रही है |
पर जिन्दगी का तजुर्बा देता है |
जिन्दगी को जीने का सलीका देता है |
जिन्दगी को जानने वजीफा देता है |

गर कोई छलांग मारकर, निकल जाता है सेहरे के फूलों से |
तो वह रह जाता है महरूम, जिन्दगी के कुछ नजारों से |
तो जिन्दगी में काटकर जाना ही, बेहतर है |
कम-से-कम फिर तो वापस लौटना पड़ेगा, सबकुछ सहकर |

कुछ वो

कुछ वो परेशान कर रही थी |
कुछ जिन्दगी परेशान कर रही थी |
कुछ संजीदगी ने हाल बुरा किया था |
कुछ आवारगी ने बेपर्दा किया था |

हमको तो

हमको तो मंज़ूर नहीं, दुश्मनी का ये फ़साना |
गर दोस्ती अब कर लो, फिर दुश्मनी निभाना |

गर कबूल

गर कबूल थी मोहब्बत |
तो यह फ़साना न बनता |
अफसाना न कहते लोग |
कोई दीवाना न बनता |

शालिनी कौशिक जी

शालिनी कौशिक जी

आपके तार्रुफ़ का,
आपकी हौसला अफजाई का,
आपके बड़प्पन का,
तहे दिल से शुक्रिया,
अदा करता हूँ,

आपने इस जहाँ से मेरा तार्रुफ़ करवाया |
आपने इस जहाँ से मुझे जुड़वाया |
आपने इस जहाँ से मुझे प्यार दिलवाया |
आपका तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया |

बस यूँ

बस यूँ ही कुछ लिख लेता हूँ |
बस यूँ ही कुछ देख लेता हूँ |
बस यूँ ही कुछ सुन लेता हूँ |
बस यूँ ही कुछ गुन लेता हूँ |

एक तोहफा - 2

सुगंधा मिश्रा को एक तोहफा
Sugandha Mishra 




आपकी नज़र कुछ अर्ज़ किया है |
आपने उसे पसंद किया है |

गुस्ताखी माफ़ हो, दिल अपना साफ़ हो |
इस तरह पेश आने की, सजा माफ़ हो |

जवाब आया है आपका |
दिल भर गया है जनाब का |

आपने ये पसंद किया |
दिल उसका रजामंद किया |

सोचा था कहीं खफा तो न हो जायेंगे |
मेरी इस करनी को खता तो न पायेंगे |
पर दिल उनका बड़ा है |
बडप्पन उनका बड़ा है |

खुदा की नवाजिश उनपर हमेशा रहे |
खुदा उनकी हर ख्वाइश हमेशा पूरी करे |

कोई गलती

न देख तमाशा किसी और का |
तेरा भी तमाशा बन जाएगा |
वक्त बदलते देर नहीं लगती |
तू भी कर देगा कोई गलती |

जिन्दगी कम

न वक्त कम था, न जिन्दगी कम थी |
पता नहीं किस बात का गम था |
दिल कुछ नम था, आँख कुछ नम थी |
पता नहीं किस बात का गम था |

दुआ

दुआ, गरीब की हो, आमिर की हो, कबूल होती है |
खुदा सबको देता है, झोली खाली, किसी की न होती है |

बदलते ज़माने

बदलते ज़माने, पर दस्तूर न बदला |
आज भी फितूर, हूर को देखकर डोला |