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बुधवार, 17 मार्च 2021

गुमराह न

 

गुमराह न कर उम्मीदों को,
आस इस दिल में रहने दे ।
अभी तो झलक मिली है,
कुछ तो दिल की कहने दे ।

 

….……

है दबे पाँव

 

है दबे पाँव चले आना,

मेरी महफिल उरूज़ पर है ।

कुछ देर बैठकर जाना,

तेरी सहफिल दरूज़ पर है ।

 

….……

ता पसंद

ता पसंद,
यह जिक्र-ए-इनायत रहेगा ।
जमीं भी कहेगी,
आसमां भी कहेगा ।

 

….……


है मसगून

 

है मसगून,
कि तौबार-ए-अलम करता हूँ ।
तुम बैठी रहो इसी तरह,
मैं अलम-ओ-आराम करता हूँ ।

 

….……

वो जबाब-ए-हक

 

वो जबाब-ए-हक माँग सकते हैं कैसे,
जब रुसवाइयों के आँसू बह चुके हैं ।
गुमसुम बैठे हैं भरे बाजार-ए-शोरगुल में,
अब सारे जहाँ में बेरोराईयाँ खो चुके हैं ।

 

….……

यह आशिकों

 

यह आशिकों की महफिल है जनाब,
यहाँ तनहाइयाँ मिला करती हैं ।
रुसवाइयाँ मिला करती हैं,
आशिकों को कहाँ शहनाईयाँ मिला करती हैं ।

 

….……

अब अफसाने

 

अब अफसाने बयाँ नहीं होते,
तह-लो जुबान में मेरी ।
अब कहानियों ने कह दिया है,
न करो तरफदारी मेरी ।

 

….……

जद्दोजहद की

जद्दोजहद की कशमश में,

जिन्दगी की रवानियाँ गईं ।

यही इसकी, यही उसकी,

हम सबकी कहानियाँ भईं । 

 

….……


हैं जुनूँ, कि

 

 

हैं जुनूँ, कि फ़ख्त,

ख्वाईशें पूरी हों ।

चाहे जिसकी भी हों,

पर ख्वाईशें पूरी हों ।

 

….……

खामोश कदम उनके भी हैं

 

खामोश कदम उनके भी हैं

 

खामोश कदम उनके भी हैं,
खामोश कदम मेरे भी हैं ।
खामोशियाँ मंजर में छाईं हैं,
न किसी ने नज़र मिलाई हैं ।

कदम मेरे उठ न रहे हैं,
वो भी धीरे.......धीरे चल रहे हैं ।
दोनों के दिल पर बोझ है,
दोनों इसे समझ रहे हैं ।

वो राह अपनी पकड़ रहे हैं,
मैं राह अपनी पकड़ रही हूँ ।
उनकी मजबूरियाँ मुझे पता हैं,
मेरे मजबूरियाँ उन्हें पता हैं ।

बस आखिरी मिलन को आए थे,
बुझे हुए दिलों को लाए थे ।
कुछ देर खामोशी में गले लगाए थे,
दिल ही दिल में रोए थे ।

 

.......

रविवार, 11 अक्टूबर 2015

है दूर

है दूर नहीं, पास की बात है,
बस अभी-अभी हुई, मुलाकात है,
क्या कहूँ गुफ्तगू-ए-आलम, वो क्या कह गयी,
बस नज़रों ही नज़रों में, पैगाम-ए-मोहब्बत दे गयी,

दागदार है


दागदार है जिंदगी मेरी,
खुशनुमा माहौल कहाँ से लाऊँ,
कहो तो कतरा-कतरा,
बिखरे लहू को समेट लाऊँ,

रविवार, 10 नवंबर 2013

उसे पता

उसे पता भी न चला,
उसके लिए,
कितने,
लड़ गये,
मर गए,
कट गए,
कितनों का खून बहा,
कितनों को चोटें लगीं,

उसे पता भी न चला,
उसके लिए,
दोस्त-दोस्त से लड़ा,
छोटा बड़े से भिड़ा,
हर कोई एक-दुसरे से चिड़ा,
दोष दुसरे पर मढ़ा,

उसे पता भी न चला,
उसके लिए,
दीवानगी किस-किस की,
दाव-पर-दाव,
उसके नाम पर लगे,
शहर पर सहर,
उसके नाम से बसे,

उसे पता भी न चला,
उसके लिए,
कितनों ने उसे सपनों में बुलाया,
सपनों में सजाकर,
सपनों कि रानी बनाया,
सपनों ही सपनों में,
ब्याह रचाया,
उसे पता भी न चला,

...

थोड़ा तो

थोड़ा तो इकरार कर लो,
जी भरकर प्यार कर लो,
हर तरफ दीवानगी है,
कुछ तो कुछ इज़हार कर लो,

...

है दूर

है दूर कि नहीं,
पास कि बात है,
बस अभी-अभी हुई,
मुलाकात कि बात है,

...

दागदार है

दागदार है, जिन्दगी मेरी,
खुशनुमा माहोल, कहाँ से लाऊँ,
कहो तो, क़तरा-कतरा,
बिखरे लहू को समेट लाऊँ,

...













रविवार, 13 अक्टूबर 2013

कोई तूफान

कोई तूफान,
उठते-उठते,
ठहर गया,

कोई मन्जर,
निकलते-निकलते,
रुक गया,

कोई कुछ,
कर गया,
कोई कुछ,
कर गया,

धड़कते दिल,
से अरमा निकल गया,
वो गया,
वो गया,

है आदिल

है आदिल का आएना वो, नब-ए-निज्बत से पूछ ले तू,
कहने को तो जिन्दगी है, हर हाल में जी ले तू,

श्रुति सेठ - 1

श्रुति सेठ,

तू कबसे आ गयी, तेरा ही इंतज़ार बहुत देर से था,
तेरे बिन सब सूना था, तेरे बिन सब बोर सा था,

तू अब आ गयी, शो में बहार छा गयी है,
एक ताजगी आ गयी, तू तो बहुत समां गयी है,

तेरे इस अंदाज़ का, कबसे इंतज़ार था,
तेरी इस आवाज़ को, दिल सुनने को बेकरार था,

तेरा आना बहुत अच्छा लगा, यह शो बहुत सुंदर लगा,
तेरा यह दीवाना, बहुत खुश होने लगा,

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शनिवार, 7 जनवरी 2012

हमसे किनारा कर लिया

हमसे किनारा कर लिया, पर दूर तलक कैसे जाओगे ,
नज़रों से ओझल कर चुके, पर पलक कैसे झपकाओगे,

हैं मुन्तज़र आपकी खातिर, इस जिन्दगी का हर एक पल,
पलक जो पल-पल झपकाओगे, तो सामने हमें ही पाओगे,

रहेगा आपसे ये नाता, इस नाते को न छुड़ा पाओगे,
दिल की धड़कन एक है धडकती, उसको कैसे रोक पाओगे,

दूर से सही मगर जिन्दगी में, कैसे हमें भुला पाओगे,
जब भी दिल की धड़कन सुनोगे, हमें ही धडकता पाओगे,

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