कविता कौशिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कविता कौशिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 13 अक्टूबर 2013

श्रुति सेठ - 1

श्रुति सेठ,

तू कबसे आ गयी, तेरा ही इंतज़ार बहुत देर से था,
तेरे बिन सब सूना था, तेरे बिन सब बोर सा था,

तू अब आ गयी, शो में बहार छा गयी है,
एक ताजगी आ गयी, तू तो बहुत समां गयी है,

तेरे इस अंदाज़ का, कबसे इंतज़ार था,
तेरी इस आवाज़ को, दिल सुनने को बेकरार था,

तेरा आना बहुत अच्छा लगा, यह शो बहुत सुंदर लगा,
तेरा यह दीवाना, बहुत खुश होने लगा,

.

शनिवार, 7 जनवरी 2012

हमसे किनारा कर लिया

हमसे किनारा कर लिया, पर दूर तलक कैसे जाओगे ,
नज़रों से ओझल कर चुके, पर पलक कैसे झपकाओगे,

हैं मुन्तज़र आपकी खातिर, इस जिन्दगी का हर एक पल,
पलक जो पल-पल झपकाओगे, तो सामने हमें ही पाओगे,

रहेगा आपसे ये नाता, इस नाते को न छुड़ा पाओगे,
दिल की धड़कन एक है धडकती, उसको कैसे रोक पाओगे,

दूर से सही मगर जिन्दगी में, कैसे हमें भुला पाओगे,
जब भी दिल की धड़कन सुनोगे, हमें ही धडकता पाओगे,

.

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

चन्द्रमुखी चौटाला - 3

कविता कौशिक, Kavita Kaushik
  .

आपका अंदाज़-ए-उर्दू भा गया,
आपकी अदा से अदावत पा गया,
वाह-वाह क्या बात है,
आपकी जुबाँ-ए-उर्दू लाजवाब है,

वो नाज़ुक अंदाज़, आपका आज हटकर था,
वो अदाकारी का अंदाज़, आज आपका नायाब था,

वो लफ़्ज़ों को बोलने का अंदाज़,
हमें बहुत कुछ सिखा गया आज,
आज का आपका नजरिया-ए-नाज़,
आपकी नजाकत दिखा गया आज,

नाज़ुक-ए-हुश्न की हसीना आप फब रही हैं,
आज आप इस लिबास में हसीन लग रही हैं,
आज आपके इस अंदाज़ के हर कोई दीवाने हुए,
आपकी अदाकारी के किस्से गली-गली सुनाने हुए,

.