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शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2011

दूर वो जिन्दगी

दूर वो जिन्दगी से अब,
धीरे-धीरे जाने लगे हैं,
उनकी चाल से महसूश किया,
किसी की अपनाने लगे हैं,

हमने भी उन्हें छोड़ दिया,
आज़ादी दे दी,
तब से लेकर तब तक,
जिन्दगी उनके बिना ही जी ली,

वर्षों बाद दिखे थे,
एक हसीना के साथ,
घूम रहे थे दोनों,
डाले हाथों में हाथ,

हम उनके सामने न आए,
वो हमको न देख पाए,
दूर से ही नज़र रखी,
अपनी ही सहेली दिखी,

.

हम आके

हम आके, उन्हें निगाह बस्त कर बैठे
ओ आके हमसे निगाह एक कर बैठे,

वो अहसास निगाह से निगाह मिलने का,
कुछ हम ले बैठे, कुछ वो ले बैठे,

उस लम्हे को हम आज तक संभल बैठे,
बार-बार याद कर बैठे, बार-बार अहसास कर बैठे,

जब भी वो हमसे रूठे, जब भी हम तन्हा बैठे,
पल वो निगाह में ला बैठे,

.

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

कुछ निगाहें उनकी

कुछ निगाहें उनकी,
दूरी-दूरी बना रही थी,
पास आने से,
कतार रहीं थीं,

दूर से निगाह भी,
न मिला रहीं थीं,
दूर-दूर ही वो,
चली जा रही थीं,

सोचो,
मंज़र-ए-हकीक,
क्या गुजरी होगी,
मेरे दिल पर,

जो रोज़ आगोश में,
मचलती थीं,
आज दूर से ही,
निकलना चाहती थीं,

जाते हैं,
वजह को,
तलाशते हैं,

क्यूँ दूर-दूर,
ये,
मुगालते हैं,


.

वो नज़र

वो नज़र,
किस तरह,
मुझे,
पड़ने की,
कोशिश,
कर रही है,

वो नज़र,
किस तरह,
अपने को,
छुपाने की,
कोशिश,
कर रही है,

मुस्कान-ओ-हैदर से,
चेहरा,
खिल,
उठा है,

उसे देखकर,
मेरा दिल,
मचल,
उठा है,

ये सवारीं,
जुल्फें,
ये तक्बीरियत,
बैठने की,

सफा-ए-हुश्न से,
मत पूछो,
वज़ह,
रूठने की,

फ़नक-ए-रूह,
अब,
सामने,
आईं है,

अनक-ए-रूह,
तब,
हमने,
मिलाईं हैं,

.

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

उनकी उलझनों से

उनकी उलझनों से,
कुछ सुलझनों को,
सुलझा-सुलझा कर,
उलझा-उलझा दिया,

सोच लिया,
समझ लिया,
जान लिया,
पहचान लिया,

उनकी उलझनों में,
खुद को उलझा लिया,
उलझनों को,
सुलझा दिया,

.

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

तुझे देखकर

तुझे देखकर,
दिल की,
धडकन,
तेज हो गयी,

निगाहें,
तुझ पर,
ठहर-सी,
गयी,

मत पूँछ,
हाल मेरा,
बेसुध पड़ा हूँ,
बरामदे में,

मनसूबे,
बना रहा हूँ,
तुझसे,
मिलने के,

बहाने,
ढूंड रहा हूँ,
घर से,
निकलने के,

न कुछ,
खाया है,
न कुछ,
पिया है,

पता नहीं,
कुछ अजीब-सा,
मज़ा,
मिल रहा है,

.

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

ये जगह

ये जगह,
इतनी,
खुबसूरत न थी,
जितनी,
तुम्हारे,
आने से हो गई,

तुम्हारी,
खूबसूरती,
इस पर,
छा गई,
जिससे तुम,
दिल में,
समा गई,

चाहे,
मुलाकात,
हो की,
ना हो,
पर ख्यालों में,
तुम ही,
छा गई,

इसी तरह,
तुम्हे,
निहारते हुए,
तुम हमें,
भा गई,

.