चन्द इशहार

इश्क में हारे हुए के, चन्द जख्म, कुरेदते रहते हैं, न लगाते मरहम,

शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

पप्पू परिहार की नज्मे ग़ज़लें_पप्पू परिहार बुण्देलखण्डी


 

प्रस्तुतकर्ता Pappu Parihar Bundelkhandi पर 7:42 am कोई टिप्पणी नहीं:
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